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 धीरे बोलो कोई सुन ना ले यह बात हम सबके कानों में पड़ी होगी और हमारे मुंह से भी  निकली होगी लेकिन सोचने की बात यह है कि यह वाक्य कब-कब हमारे मुंह से निकलता है  और कब-कब हमारे कानों में पड़ता है क्योंकि ऐसे कम ही गुप्त राज होते हैं जो  हम दूसरों के कानों में पढ़ने नहीं देना चाहते अक्सर परिवार में अशांति का कारण हम  स्वयं ही होते हैं हम इस बात को देख पाए या भले ना देख पाए पर यह असल सत्य है  क्योंकि जाने अनजाने मूर्खता वश हम खुद ही अपनी वह बातें दूसरों को बता देते हैं जो  हमें कभी नहीं बतानी चाहिए और वही बातें जो जाने-अनजाने में हमने किसी दूसरे के  सामने बता दी थी वही हमारे दुख का कारण बन जाता है वही हमारे झगड़े का कारण बन जाता  है और फिर बाद में हमें पछतावा होता है कि मुझे यह बात किसी को बतानी नहीं चाहिए थी  मेरी ही गलती हुई कि मैंने मैंने जाने अनजाने में यह बात सभी को बता दी इसीलिए  आज की यह जो बौद्ध कहानी मैं आपको सुनाने वाला हूं उसे सुनने के बाद आपको सात ऐसी  बातें पता चलेगी जो आपको कभी किसी को नहीं बतानी यह जो सात बातें हैं ज...